थारू समुदाय, सिकल-सेल ओ सरकार


सिकल–सेल एनिमिया मलेरिया प्रभावित हुइल क्षेत्रके मनईनके रक्तकोषमे डेखपर्ना समस्या हो । यी सरुवा रोग नै होके वंशानुगत जिनसे सर्ना रोग हो । यी अमेरिकामे हुईल अध्ययनके आधारमे कहलेसे फेन नेपालमे यकर विषयमे कौनो अध्ययन नै हुईल हो । मनईनके शरिरमे रहल रक्तकणिकाके आकार गोलाकार नै होके हँसिया आकारके हुइले से सिकल–सेल लागल पटा पाई सेकजिना चिकित्सकहुक्रनके कहाई बा ।

सिकल–सेलसे प्रभावित डाईबाबा से जन्मल सन्तानमे रोगके जीवाणु २५ प्रतिशत डेखा परठ कहिके बीर अस्पतालके मेडिसिन विभागके प्राध्यापक डा. सुबेषराज कायस्थ बतइठै । सिकल–सेल लागल मनैन्हे जोर्नी सुवइना, हेमोग्लोबिनके कमी, रक्तअल्पता हुईना, पेट जब्बे टब्बे बठैटी रहना, जन्डिस डेखा पर्ना, छाती, मुटुमे समस्या डेखा पर्ना, हड्डी कम्मर बठैना जसिन लक्षण डेख्जाइट कहिके डा. कायस्थ बटैल ।

ओस्टक कैलाली जिल्लामे सिकल–सेल रोग लागल बेरामीन्के पहिचान बढ्टी रहल आपन अध्ययनमे डेखगिल उहा बटैला । कैलाली जिल्लामे रहल सेती अञ्चल अस्पताल ओसीन बेरामीनहे २०७१ साल साउन महिनासे अस्पतालके नर्सिङ अधिकृत यशोदा ढकालहे काउनसिलिङके जिम्मेवारी देले बाटिन । उ अब्बा कैलाली जिल्लामे किल २ सय ६० जनहनहे काउनसिलिङ करठी । सेती अञ्चल अस्पतालके पहलसे प्रभावित समुदायहुक्रनहे उपचारके लाग उर्जा मिलल बाटिन । काउनसिलिङके क्रममे ढेर बेरामी पुनर्जीवन पाईल महशुस करल ढकालके अनुभूति बाटीन ।

कैलाली जिल्लामे किल सिकल–सेल हो कहिके रोग पत्ता नैलागके ढेर विरामी मृत्युके मुखमे पुगल बाटै । मने आपन ठन आपुगल बेरामीन्के उपचारसँगे काउनसिलिङ कर्र्ना सुरु हुईल पाछे उहाँ हुक्र मानसिक रुपम बलगर हुइल बाटै कहिके ढकाल बटैठी । उहाँ कहठी– ‘यी रोग लागलपाछे बेरामीन् आजीवन डवाइ खाइक परठीन मने काउनसिलिङके कारण सोचल से फेन लम्मा जिन्गी जिना सफल हुईल बाट ।’

पछिल्का समयमे सेती अञ्चल अस्पतालमे उपचार करे आइल सिकल–सेलसे प्रभावित १२ जनहनके मृत्यु हो सेकल डा. कायस्थ बटैल । सिकलसेल वंशाणुगतसे सर्लक ओर से यी रोग बच्चा वा जवानमे बढि डेखा परल बा । कैलालीमे किल १५ से २५ वर्ष उमेर समुहके १० जाने व १ जाने ६० वर्षके महिला व ५१ वर्षके १ एक जाने पुरुषके सिकल–सेलसे मृत्यु हुईल सेति अञ्चल अस्पतालमे पुष्टि करल तथ्यांक बा ।

सिकल–सेल रोग लागल बेरामीनहे उपचारस्वरुप सरकारसे १ लाख रकम औषधि खर्च अनुदान मिल्ले से फेन उ एकदम झन्झटिलो प्रक्रियाके कारण ढेर विरामीहुक्र सेवा पाई नैसेक्ठुईट । डा. कायस्थके अनुसार कैलालीमे सिकल–सेल पुष्टि हुईल २ सय ६० जाने उपचाररत हुईले से फेन १ सय ६० जाने केल सरकारी अुनदान प्राप्त करले बाट । गाउँबस्तीमे कत्ना विरामी बटै कहिके एकीन नै हो । थारु समुदायमे सिकल–सेलबारे जानकारी नै हुईलक कारण इही से कत्ना प्रभाव बटै कहिके अनुमान कर्ना कठिन बा ।

गइल वर्ष थारु बुद्धिजीविहुक्रे अन्तर्राष्ट्रिय सिकल–सेल दिवसके अवसरमे धनगढी उपमहानगरपालिकासे जोडल उर्मा गाविसमे सिकल–सेल एनिमियाके रोकथामके विषयमे अन्तरक्रिया हुईरहे मने उहाँके थारु समुदायहुक्रे सिकल–सेलबारे कुछु जानकारी नैरहल बतैल ।

सिकल–सेल रोग लागेके विरामीहुक्रनके दिन प्रतिदिन पहिचान खुल्टी बाटिन । असीन वेरामी हुक्रे संख्यात्मक रुपले बृद्धि हुइटी गैले पर फेन उ तर्फ सरकार परिणाममुखी कार्यक्रम कुछु नैलानल डेख्जाईठ । सिकल–सेल प्रभावित जिल्ला कहिके कैलाली, कञ्चनपुर, बाँके, बर्दिया, दाङ लगायतके तराई जिल्लामे जिल्ला जनस्वास्थ्य कार्यालय मार्फत तमान कार्यक्रमके लाग बजेट छुट्याइल सुन मिलठ, मने ओकर सदुपयोग नैडेखगिल हो । सिकल–सेल रोग रक्तअल्पता हुइना किल नै होके आउर समस्या फेन डेखजिना हुईलक ओर से सरकार गम्भीर हुईना आवश्यक बा । विज्ञ चिकित्सकके अनुसार ‘उमेरसमूह अनुसार सिकल–सेलके लक्षण डेखा परलक ओर से सक्कु उमेर समूहके मनैन हे स्वास्थ्य परीक्षण कर्ना जरुरी बा ।’

सिकल–सेल रोग लावा नै हो । यी विकसित देशमे फेन बा । सिकल–सेल एनिमियाके बिरामी संसारमे लाखौं बटै । अफ्रिका, दक्षिण अमेरिका, ग्रीस, दक्षिणी मुलुक, अरब, क्यारेबियन देशमे व भारत जसिन गर्मी हुईना देशमे यी रोगके प्रभाव बा । पुस्तौं आघे अमेरिका पुगल अफ्रिकन्मे सिकल–सेल डेखा पर्लक ओरसे यकर कीटाणुसे पुस्तौंसम नैछोड्ना अध्ययनकर्तन्के कहाई बाटिन् । अफ्रिकी मूलकके हरेक ५ सय जनहनमेसे १ जनहनमे व दक्षिणी अमेरिकी मूलकके हरेक १ हजारमनसे १ जाने सिकल–सेलसे पीडित बाटै ।

यी रोग प्रायः गर्मी क्षेत्रमे बसोबास करुईया आदिबासी जनजातिननमे डेखा परल बाटिन् । पुस्तौंसे थारु समुदाय तराईके गर्मी क्षेत्रमे बसोबास करलक कारण हुई यी समुदायमे सिकल–सेल देखापरल बा । हालसम्म तराईके बाँके, बर्दिया, दाङ, कैलाली व कञ्चनपुरमे बसोबास करुईया थारु समुदायके मनै सिकल–सेलसे प्रभावित हुई डेख्जाईट ।

यी रोगके बारेमे अन्य मुलुक मजासे अध्ययन अनुसन्धान करके प्रभावित समुदायमे सिकल–सेलके बारेमे मजा जानकारी करैटी आईल बा । सन् १९९१ मे अमेरिकन जर्नल अफ ह्युमन जेनेटिक्ससे बाँके व बर्दियाके थारु समुदायबीच अध्ययन करके सिकल–सेल टे«ट हुईल मनैनहे सामान्य मनैनसे सात गुणा मलेरिया कम हुईना आपन रिपोटमे उल्लेख करले बा । तर, उ रिपोर्टमे सिकल–सेलके मात्रा ट्रेटसे एनिमियामे पुगि टे कसिन प्रभाव परि कहिके कहु फेन उल्लेख नै हो । यीहिसे फेन का डेखा परठ की सिकल–सेलके बारेमे गहिर अध्ययन नैहुईल हो ।

कैलाली बाहेक दाङ, बाँके, बर्दिया, व कञ्चनपुरमे सिकल–सेलके कठेक बेरामी बाट, आधारिक तथ्याङ्क सरकारके ठन नैहो ।

नियन्त्रण व रोकथामके उपाय

सिकल–सेलसे बच्ना व नियन्त्रण कर्ना एकठो उपाय भोज कैना जोडीन्हे काउन्सिलिङ कर्ना हो । विवाह कैना युवा व युवती महनसे एक जनहनमे सिकल–सेल डेखगिल बा कलेसे उइनके बच्चामे सर्ना सम्भावना रहठ । डुनु जनहनमे सिकल–सेलके जीवाणु बा कलेसे उइनके सन्तानमे बहुत ढेर सर्ना सम्भावना हुईलक ओरसे सिकल–सेलसे प्रभावित डुनु जाने भोज कर्ना उचित नै मानजाईठ ।

विकसित मुलुकमे भावी पुस्ताहे सिकल–सेलसे सुरक्षित रहकलाग सरकार जो युवनहे काउन्सिलिङ करठ, मने नेपालमे सरकार यकर विषयमे कौनो चासो नैडेखइले हो । टबेमारे थारु समुदायके युवा युवतीहुक्र भोज कर्नासे पहिले स्वास्थ्य परिक्षण करलेसे फेन रोकथामके लाग मजा उपाय हुई सेकठ । सरकार प्रभावित क्षेत्रके मनैनहे नियमित रुपमे निःशूल्क रगत परीक्षणके व्यवस्था करि टे यी रोग विस्तारे कम हुई सेक्ना विज्ञहुक्रे बटैठै ।

यी रोगके प्रभाव पुस्तौँसम डेख गैलक् कारण सरकार यकर बारेमे गम्भीर हुईना जरुरी बा । मने, सरकारके ठन कौनो तथ्यांक नै हुईलक ओरसे सक्हुहन के लाग चासोके विषय बने पुगल बा । सरकार यी विषयमे गम्भीरताके साथ प्रभावित क्षेत्रमे विषेश जोड डेना ढिला ना करे । नैकी ढिलाई हुई टे थारु समुदायके भावी पुस्ता ढेर प्रभावित हुइना खतरा बा ।

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स्रोत : गोरखापत्र, फागुन २९

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