थारूके जितैके आधार कथि ?


प्रारम्भ

थारू आपन उपर भेल दमन आ राज्य प्रायोजित विभेद के विरुद्ध संघर्षरत छै । राज्य संविधानके विशेषता सब देख्याके यतेका शासकवर्ग कतौ ने थारू उपर अन्याय भेल वात निरन्तर बत्या रहल छै । यी दुई अवधारणामें एकटा त जरुर दोषी छै । भ्र्रम आ यथार्थताके सही पहिचान हैके छै । लवका संविधान घोषणा पाछे बनल एमाले नेतृत्वके सरकारमें फोरम लोकतान्त्रिकके अध्यक्ष विजयकुमार गच्छदार आ रामजनम चौधरी क्याविनेट मन्त्री छै । तकर बाबजुदो थारू सब चित नै बुझ्हाबैके कारण कथि ? फोरम लोकतान्त्रि कसरकार में सहभागी बनैके सिलसिलामें एमाले सँगे आठ बुँदे सहमति करने छेलै । अखुन सरकार बनल सातौ महिना बित रहल छै, मगर आठ बुँदे सहमतिके चर्चा आई तलिक कैहियो नै भेलै ।

विजय गच्छदार के अखुन्वो थारूसब नेता मानैछै, आ तकर प्रमाण विराटनगर मे पार्टी के उद्घाटन समारोहमे बैशाख २० गतेके उपस्थिति मानल ज्यासकैये । संघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्रात्मक नेपालके सरकारी सुविधा सहित सम्पन्न महाधिवेशन स्वाभाविक रुपमे आकर्षक देखल गेलै, मगर गच्छदार जनभावनाके कदर कैर रहल छै, तकर सत्यता यी उपस्थितिसे ठहर नै भ्यासकैये । पर्सेप्सन आ सत्यता विचके अन्तर यहा देखल जाइछै । थारूवान÷थरुहट संयुक्त संघर्ष समिति दोसरका चरण के आन्दोलन के घोषणा कैर सक्लै । आब गच्छदार के भूमिका अन्दाज लगाबैके समय येल्छै । ओकर पृष्ठभूमि आन्दोलनकारी के मालुम हेबे करतै । कारण यी से अगा संविधान निर्माणके समय में फोरम लोकतान्त्रिक के आन्दोलन प्रति स्वार्थपूर्ण लगाब रहलै । तकर बलमे रामजनम चौधरी मन्त्री बनल बात छुपल नै छै । रामजनम चौधरी तखुन आपन संयोजकत्वमें थारू सभासद संघर्ष समिति बन्याके आन्दोलन के मोर्चामे छेलै ।

पार्टी महाधिवेशनके उपलब्धी

पार्टीके नाम नेपाल लोकतान्त्रिक फोरम संशोधन करैके बहौतो प्रतिनिधिके मत रहल समाचार येलै आ पार्टी के केन्द्रिय समिति अध्यक्ष लगायत ४२ केन्द्रिय सदस्य निर्वाचित करैके वैधानिक प्रावधान अनुसार केन्द्रिय सदस्य समावेशी तरिकासे छनौट करल गेलै । यत्हेक काम रहै महाधिवेशन के यी सतप्रतिशत उपलब्धीके साथ महाधिवेशन ओरेलै । बात रहलै प्रतिस्पर्धाके कि लोकतन्त्रमे प्रतिस्पर्धा हैके चाहि, जते वैचारिक हिसाब से कार्यदिशा आ कार्यशैलीमे घन्घोर बहस चलल । महाधिवेशन मे यै विषय मे कोनो तयारी कार्यकर्ता तहमे नै रहल प्रमाणित हैछै कि स्वयम् नवनिर्वाचित अध्यक्ष स्वीकार कैल्कै कि हमर प्रतिस्पर्धी नै रहलै । अध्यक्ष गच्छदार राजनीतिक प्रतिवेदन महाधिवेशन मे पेश करने जरुर हेतै । यी संविधानके विषय मे लोकतान्त्रिक फोरमके रिजरभेसन बारे जरुर उल्लेख करने हेतै आ यकर लेल कार्यदिशा आ कार्यशैलीके सोहो चर्चा चलल हेतै । परिमार्जित प्रतिवेदन जरुर बाहर येतै, मगर प्रतिस्पर्धा नै हैके मतलब बहस नोट सोहो नै हैके संकेत चियै ।

नेता-कार्यकर्ता बिचके सम्बन्ध

कार्यशैली के विषय मे कोनो बहस नै चलैके मतलब भेलै, अखुन फोरम लोकतान्त्रिक के सम्बन्धमे नेता आ कार्यकर्ता बिचके सम्बन्ध मालिक आ कामदार बिचके सम्बन्ध छै । जते पार्टीके अगुवा के कार्यशैली डबल स्टेण्डर्ड छै, आ अविश्वास के यत्हेक बरका दरार छै, तते कार्यकर्ता आपन नेताके कार्यशैली प्रति प्रश्न नै उठाबैके मतलब भेलै कि सम्बन्ध मालिक आ कामदार नहाईत छै । जते कामदारके थोरबेहेक सुविधा बरहेने से ओकर बोली बन्द । ने त लक्ष्मण थारू जे पार्टी के राजनीतिक समिति के सदस्य सोहो छेलै, तकरा महाधिवेशनमे राजनीतिक प्रतिवेदन यी किसिम के लज्यारहल छै, सोहो पता नै हैके मतलब त दुर अखुन तलिक कोनो नेताके सम्पर्क ओकर से नै हैके कारण कथि ? टीकापुर घटनाके दोषी कैहके प्रहरी ज्यादती हैते छै आ अपराधी के आरोप मे थप कैदी संख्या बरहैत ज्यारहल छै । यकर उपर कोनो संवेदनशिलता नै अखुन्का नेतृत्वके ?

उदारवादी लोकतन्त्रमे मालिक आ कामदार विचके सम्बन्ध श्रम आ ज्याला निर्धारण करैछै । मानवता ओते गौण मानल जाइछै । शायद पार्टी नीति अनुसार नेतृत्व आपन व्यवहार देख्यारहल छै कि ? कथिले त सामन्तवादी व्यवस्थामे मालिक आपन कामदार प्रति इमान्दार देखल जाइछैलै आ कामदार प्रति आनकोइके दुरव्यवहार मालिक के इज्जत के सवाल बनैछैलै, मगर अखुन गौरवशाली पार्टीके नाममे कार्यकर्ताके विजोग देखके ककरौ भि महसुस हैत हेतै कि दुई चाईर गोटे के जीवन सुरक्षित करैले हजारौ कार्यकर्ता श्रम लगानी उचित चियै कि नै ? जे नै हैबला छै, ओहे भ्यारहल छै ।

आन्दोलनकारी के ल्याकत

सदावहार नारा कि हम सब के आन्दोलन जारी छै, आ हमर माग पूरा कर । आन्दोलन के अवधि भैर यी नारा के महत्व सँगे गच्छदार के दोसर नारा पहिने देश, तब मधेस बारम्बार सुनादैछै । यी नारा सबके अर्थ खोजी करनाई कठिन भ्यागेलै कि थरुहट प्राप्तिके वाद थारूके राजनीतिक आन्दोलन अन्त्य हेतै त ? अथवा प्राप्त थरुहट के आधारमे स्वतन्त्रता, लोकतन्त्र आ सामाजिक न्यायके आधारभूत राजनीतिक मुद्दा छिनोफानो हेतै ? गच्छदार के पहिने देश, तब मधेसके नारा बकवास नै चियै ? यते पैहने आ पाछे के बाते नै छै । बरु अन्याय, विभेद आ सिमान्तीकरण मे परल वर्ण, वर्ग, जाति, समुदाय आ लिङ्ग के जनताके राजनीतिक अधिकार आ सामाजिक न्याय प्रत्याभूतिके सवाल छै । सुरक्षा आ रोजगारी के ग्यारेन्टी के वात छै । जिम्मेवार नेतृत्वसब येहेन विसंगतिपूर्ण व्यवहार देखाइले मिल्तै ? अखुन तलिक राज्यके सँगे जनताके अन्तरविरोध कथि ? किटानीपूर्वक कहे सकैके स्थिति नै छै ।

दोसर वात एक दिसन आन्दोलन करैछै आ चरित्र पूरे दलाल के । पुरे थारू समाजके अखुन यै दिसामे अग्रसर कराबैके प्रयत्न कैर रहल स्थिति छै कि संघर्ष आ आन्दोलनके कोनो मूल्य आ आदर्श नै रहैछै ? अगुवासब के विश्वास कैरैबला आधार कथि ? रामजनम चौधरी फेनो नै जलम लेतै तकर विश्वास के आधार कथि ? कि आन्दोलन अथवा संघर्ष घरबादुअरबा खेल चियै जते एके छन मे उसाइर दी ? अखुन तलिक कैदी सबके हालत कि अध्ययन करैके आन्दोलनकारीके निकाय छै त ? धनीराम चौधरी के नेतृत्व प्रति आबो आसक्ति कोन हिसाब से ? व्यक्तिगत हिसाबसे हमर ककरो से ने गुनासो छै ने आग्रह, मगर प्रवृत्ति देखल ज्या त स्वार्थपूर्ण गठबन्धन जते आपन आपन दोकान छाइन्के आन्दोलनके नाममे दलाली करैले भिरल छै । खबरदार ! ककरो यते गोटे थारू राष्ट्रियताके दलालीके ओर अग्रसर कराबैके छुट नै छै ।

निष्कर्ष

थारू और राज्य विचके अन्तरविरोध मूलतः राष्ट्रियताके देखल जाइछै । असली हिन्दुस्तानाके जगमें निर्माण करल गेलै गोरखाली पर्वते राष्ट्रियता थारू राष्ट्रियता दावीके अखुन तलिक इन्कार कैर रहल छै । संविधान में उल्लेखित थारू शब्द कोनो राजनीतिक परिभाषा भित्तरके शब्द नै चियै । यकर राजनीतिक अर्थ नै भेने से यी अलग पहिचानके स्प्रीट नै बोकैछै । ओर दिनसे हमर दावी येहा रहलै कि थारू उपर राजनीतिक बलात्कार भ्यारहल छै । और यी संविधान अन्तरिम संविधान के तुलनामें प्रतिगामी छै । थारू अखुन औपनिवेशिकता भित्तर जी रहल छै, जते संविधान घोषणा पाछे आपन घर जोहो छैलै ततौ से निकाइल देल्कै । अखुन राज्यविहिन राष्ट्र के रुपमें छै आ सार्वभौमिकता त ओकर लेल कोशौं दूरके बात चियै । संविधानके प्रस्तावनामें लिखल गेल सार्वभौमिकता आ सार्वभौमसत्ताके बात त थारू राष्ट्रिय मुक्ति क्रान्ति मार्फत् मात्रे प्राप्त कैर सकैये आ यै विषय में दुविधा त ककरो नै हेवाके चाही । रहलै वात जै ढङ्गसे थारूके नक्कली प्रतिनिधित्व अगुल्का आन्दोलनमें रामजनम चौधरी लगायतके सभासदसब कैल्कै तकर कम्ब्याटिङ्ग (सुरक्षा) आबके आन्दोलनमें कोन हिसावसे करल जेतै ? सावधानी त जरुरी छै । कि आन्दोलनकारीके दण्ड देबे सकैबला क्षमता निर्माण करे पर्लै अथवा नेतृत्व मूल्य आ मान्यता में अडिग भ्याके जीवन दर्शनके व्यवहारिक प्रयोग गान्धी नहाईत करे पर्लै ।

अखुन कोन थारू नेतृत्वके व्यक्तित्व यै पक्षमें छै, जकर लेल सरकारी लाभ के पद आन्दोलनके मूल्य आ मान्यताके तुलनामें छोट देखेतै ? अथवा के आन्दोलनके मूल्य आ मान्यताके लेल लाभके पद त्याग कैर सकैये ? आन्दोलन प्रतिके जिम्मेवारीपन कोन नेतृत्वकर्ता इमानदारीके साथ निर्वाह कैर सकैये ? यकर जवाफ आन्दोलनकारी जनतासब जरुर खोजी कैर रहल अनुमान सहजै भ्यारहल छै । आब थारू जितैके आधार कथि ? निराश हैके वाते नै छै कि राज्य संयन्त्र पुरे दलाली करैके ओर रुपान्तरित भेल्छै आ संविधान कार्यान्वयन करैसे अधिक यी सब पुराने सत्ताके टिकाबैके अन्तिम खेल खेलैले लागल छै । नैतिक रुपमें पुरे संकट में परल शासकवर्ग आब खस पर्वते राष्ट्रियताके आड में आयु बरहाबैके महेन्द्रपन्थी लाइन पक्रने छै त आब ओकरे निशाना बन्याके आन्दोलन यदि नैतिक आ इमानदारीके साथ उठाबैके प्रयास हेबे त विजयी निश्चित छै ।

अन्तमें, राष्ट्रिय मुक्ति क्रान्तिके वस्तुगत आधार तयार छै । यते आन्दोलन उठतै सोहो विश्वास छै, मगर नेतृत्वके चरित्रसे सम्बन्धित कमजोरी सब यकरा बिच बाटमें वेवारिस बनाबैके सम्भावना इन्कार करल नै ज्यासकैये । दोसर, स्वार्थ समूहके रणनीतिक गठबन्धन में यदि रुपान्तरण नै करे सके त आपने भित्तरमें संघर्ष बैह्र सकैये । डेरिक जेन्सन के कथन सापटी ल्याके यी लेख अन्त करब कि मालिक के घर मात्रे एकटा औजार चाहे ह्यामर, विष्फोटक पदार्थ अथवा डिस्कोर्ष से ध्वंस नै करल ज्यासकैये । यकर मतलब आखुनका आन्दोलनकारीके कार्यभार यी तिनु औजार के विवेकपूर्ण तबर से प्रयोग कैरके निशाना सादहैके चाही । यैमे आत्मगत तयारी महत्वपूर्ण देखल जाइछै, कथिले त विपरीत प्रतिक्रियाके थम्हैवला क्षमता आत्मगत तयारी से मात्रे भ्यासकैये । आशा करल जाय कि आन्दोलनकारी येम्की बेर आत्मगत तयारी पूरा करने हेतै, मगर विश्वास संघर्षके मैदान से मात्रे भ्यासकैये ।

स्रोत : २९ बैशाख, गोरखापत्र

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