आन्दोलनके धम्की आ बहुमतके अभिमान, मझधारमे जनताके संविधान


संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चाक माघ १८ गतेके बैसारमे मधेशी जनअधिकार फोरम लोकतान्त्रिकके अध्यक्ष विजयकुमार गच्छदार आन्दोलन तत्कालके आवश्यकता नहि रहल कहलनि । विपक्षी दलके प्रदर्शन कार्यक्रममे एक दिनके आन्दोलनमे पाँच लाख रुपैया खर्च भेल कहैत गच्छदार आर्थिकरुपसँ सेहो आन्दोलन महँग रहल दाबी कएलनि । राजधानीक बानेश्वरस्थित सद्भावना पार्टी कार्यालयमे भेल मोर्चाक बैसारमे मधेशी जनअधिकार फोरम नेपालक अध्यक्ष उपेन्द्र यादव आन्दोलन एक मात्र विकल्प रहल कहलाक बाद गच्छदार ओकर प्रतिवाद कएने रहथि । यद्यपि जहन गच्छदार बजलनि तहन यादव किछु काज अछि से कहि बैठकसँ बहरा गेल रहथि ।

उपरका ई अवस्थासँ प्रष्ट होइत अछि जे मधेश केन्द्रित राजनीतिक दलबीच संविधानसभा बाहर जाक कएल जायबला आन्दोलनके देखबाक दृष्टिकोणमे कतेकराश अन्तर छइ । आन्दोलके देखबाक इएह दृष्टिकोणके कारण मोर्चामे वैचारिक दूरी बनि गेल अछि । सत्तासिन राजनीतिक दलप्रति नरम रुख राखिक आगू बढबाक चाही से मान्यता रखनिहार गच्छदार आ सडक संघर्षके अन्तिम विकल्प देखनिहार यादव अपन अपन विचार अडल छथि ।
यद्यपि कांग्रेस आ एमाले बहुमतीय प्रकृयाक आधारमे संविधान बनारहल कहैत सडक आन्दोलन करबालेल मधेशी मोर्चा औपचारिक निर्णय कएने अछि । ताहि अनुरुप नेता, कार्यकर्ताके निर्देशन सेहो द देल गेल अछि । मुदा संवाद वा संविधानसभा छोडिक संघर्षमे सँ की चुनब ताहिमे मतभेद जारीए अछि ।

ओलीक विषवमन

बालुवाटारमे राज्य पुनर्संरचनासहितके विषयमे कांग्रेस, एमाले, एकीकृत नेकपा माओवादी आ मधेशी मोर्चाक बैसारमे एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली विहार आ उत्तर प्रदेशके सेहो मधेश प्रदेशमे जोड़बाक बात आगिमे घीके काज कएने अछि । सद्भावना अध्यक्ष राजेन्द्र महतो मधेशके भूभाग मधेश प्रदेशमे राखल जाय से धारणा रखलाक बाद ओली मैदानी भूभाग सब मधेश प्रदेशमे राखब त विहार आ उत्तर प्रदेशसेहो मैदानी अछि, की ओहो राखब ? से प्रश्न कएने रहथि ।

नेपालमे मधेश अछिए नहि, एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ई बात बेर बेर कहि चुकल छथि । तेँ हुनका मुहँसँ एहन बात निकलब कोनो आश्चर्यक बात नहि । एमालेके पार्टी संरचनामे मधेशीके जे अवस्था छइ ताहिसँ सेहो एमालेके मधेश दृष्टिकोण स्पष्ट अछि । ओलीक बातसँ संवादहीनताके क्रम सुरुवात भेल । मोर्चा ओली सहभागी बैठकमे नहि बैसबाक निर्णय कएलक । एकीकृत माओवादीसेहो ओलीसँ कम परेशान नहि, ओली बहुतोबेर सार्वजनिक रुपसँ माओवादीके आन्दोलनके फज्झैत क चुकल छथि । तेँ माओवादी ई अवसरके छोड़ नहि चाहलक । ओलीक बोलीसँ आहत भेल मधेशी आ माओवादी दुनू अपन प्रतिशोधके भावनाके धधकाब जुटि गेल । ओलीसहितके तीन प्रमुख दलके बैसारमे भलेहि गच्छदार सहभागी भेल होथि मुदा मधेशी मोर्चा तहिएसँ दुरी बनाब लागल ।

विपक्षी ३० दलीय मोर्चासेहो किया चुप रहैत, ओहो ओलीके मानसिक रोगीके संज्ञा द देलक । एक दोसरापर आरोपप्रत्यारोप आब गारागारीधरि पहुँच गेल अछि । एहिसँ दल विशेषके कार्यकर्ता भलेहि खुशी भेल हुअए आम जनता त निराश मात्र भेल अछि । कियाक त ई समय चुनावके नहि अछि, संविधान बनएबाके अहं भूमिकामे दलसभके जनता पठओने अछि । जनतासँ चुनल सभासद्सभ संविधानसभासँ संविधान देबाक समयमे गैरजिम्मेवार भ क गारागारी क रहल अछि ।

झण्झट

एमाओवादी २०६४ सालके संविधानसभा चुनावसँ पहिल राजनीतिक दलके रुपमे उभरिक आएल । तहिना मधेशी मोर्चा चारिम राजनीतिक शक्ति बनल । २०७० सालके संविधानसभा चुनाव दुनूके नयाँ हैसियतमे आनि देलकइ । माओवादी तेसर आ मधेशी पाँचम् शक्ति बनि गेल । चुनावक परिणाम एलाक बादेसँ ई दुनू शक्तिबीच सहकार्य शुरु भगेलइ । संघीयतावादी कहैत ई दुनू शक्ति एकटा मोर्चा बनओलक, जे एखन बढैत बढैत ३० दलीय भ गेल अछि ।

राज्य पुनर्संरचना, शासकीय स्वरुप, निर्वाचन प्रणाली आ न्याय प्रणाली संविधानक ई चारिटा विवादित विषयमे कांग्रेस आ एमालेक सझिया प्रस्ताव संवैधानिक राजनीतिक संवाद तथा सहमति समितिमे पेश भेलाक बाद सत्तापक्ष आ विपक्षी दलबीच दुरी आओर बढ लागल । बहुत रास घमर्थनके बाद अन्ततः वएह प्रस्तावके आधारपर सत्तासिन दल संविधानसभामे प्रकृया आगू बढओलक आ विपक्षी दल विरोध कार्यक्रम ।

सडकबाला भिटामिन

किछु दिनके रस्साकस्सीके बाद जहन प्रश्नावली समिति संविधानसभासँ बनि गेल तहन विपक्षी सडकके चुनने अछि आ सत्तासिनदल संविधानसभाक प्रकृयासँ वेड़ा पार करके प्रयास क रहल अछि । संविधानसभामे संख्याक हिसाबसँ कमजोर शक्ति सडकमे आ बलगर शक्ति संविधानसभामे अछि । सत्तासिन दलक किछु नेताक अगिलेसू बोली आ विपक्षी नेताक आन्दोलनके दम्भक कारण संविधानसभापर संकटक बादल मड़रा रहल अछि । विपक्षी दल इएह मौकामे सडकसँ मजबुत होबके फिराक मे अछि त सत्तासिन दल अपन गणितीय संख्याके भजाब मे लागल अछि ।

ओलीक ओलसन बोलीसँ खिसियाएल विपक्षी नेता सडक आन्दोलनक ई अवसरके छोड़ नहि चाहैत अछि । सत्तापक्षक व्यवहारसँ ओ ई बूझि गेल अछि जे संविधानसभामे रहिक किछु होबबला नहि । एमाओवादी मधेशी मोर्चासँ सहकार्य क मधेशमे धधरा लगाब चाहैत अछि आ बालुवाटार आ बल्खुके ओहि धाहीसँ सचेत कराब चाहैत अछि ।
मधेशी मार्चामे आबद्ध दल पछिल्का संविधानसभा चुनावसँ चोटाएल साँप बनि गेल अछि । जकरा अपन आधार क्षेत्र कहैत छल ततइ कांग्रेस आ एमाले ओकरा थकुचने छइ तेँ ओ ओत्त जाक फुफकार चाहैत अछि । जनताके ई बुझाब चाहैत अछि जे तोँ जकरा मत देलही ओ तोहन पक्षमे नहि छउ ।

३० दलीय मोर्चा नरमसँ गरम होएबाक सिद्धान्तअनुसार चैतमे कडा रुपमे प्रस्तुत हेबाक निर्णय कएने अछि । एहिसँ मोर्चाके ई फाइदा हेतइ जे आन्दोलनके माहौल बना सकत । दोसर दिश संवाद आ सहमतिके प्रयासलेल सेहो बेशी समय भेटतै ।

आंकलन
सत्तारुढ राजनीतिक दल ई मानि लेने अछि जे एखन कोनो आन्दोलन सम्भव नहि छइ । तेँ ओ अपनाके कडा बनेने अछि । विपक्षी पर जाहि तरहेँ केपी शर्मा ओली आक्रामक रवैया अपनओने छथि ताहिसँ किछु निश्चित क्षेत्र आ वर्गके व्यक्तिमे हुनकर लोकप्रियता बढल अछि । एहि विषयके ओली निक जकाँ बुझैत छथि । प्रधानमन्त्री नहि बनि सकलाक बाद ओलीलग विपक्षीपर हमलाके शिवाय कोनो अस्त्र सेहो नईं अछि । ओलीक कडा रवैयाके आगू प्रधानमन्त्री सुशील कोइराला निरपेक्ष नहि रहि सकलथि । ओहो नरम भक आगू बढबाक पक्षमे नहि देखल जाइत छथि । विपक्षीसँगे केहन व्यवहार करी ताहिमे कोइरालाके अपन विवेक प्रयोग करबाक चाही, से नहि देखल गेल अछि ।

गोरखापत्र नयाँ नेपाल (मैथिली), २०७१ फागुन २ गतेबाट ।

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